यूएई ने अरब देशों के आंतरिक मामले में क्षेत्रीय हस्तक्षेप के खिलाफ कार्रवाई का किया आह्वान 

कैराे, 6 मार्च, 2019 (डब्ल्यूएएम) - यूएई ने अरब देशों के आंतरिक मामले किए जा रहे क्षेत्रीय हस्तक्षेप का मुकाबला करने के लिए अरब कार्रवाई समन्वय की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है। यूएई ने सभी अरब देशों काे संयुक्त समझ और समन्वय बना कर विदेशी दखलंदाजी के खिलाफ अपनी एकता और राजनीतिक शासन की रक्षा करने के आवश्यकता पर बल दिया। यह बयान विदेश मामलों के राज्य मंत्री डॉ. अनवर गर्गश ने अरब लीग परिषद के 151 वें साधारण सत्र में यूएई प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए दिया। साधारण सत्र कल काहिरा में आयोजित किया गया था। डॉ. गर्गश ने ईरान द्वारा ग्रेटर टुनब, लेसर टुनब और अबू मूसा तीन अमीराती द्वीप कब्जे मामले का निराकरण करने के लिए यूएई की शांतिपूर्ण कॉल का सकारात्मक जवाब देने काे ईरान से कहा। गर्गश ने यह भी पुष्टि की कि इस मुद्दे का हल केवल संयुक्त राष्ट्र, चार्टर और अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार बातचीत और अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता के माध्यम से संभव है। उन्हाेंने कहा कि अरब देशों के आंतरिक मामले में ईरान का हस्तक्षेप जारी है, इसके कई उदाहरण हैं। यमन संकट ईरानी हस्तक्षेप का उदाहरण है। गर्गस ने कहा कि अपने पड़ाेसी ईरान के साथ सामान्य संबंध की इच्छा रखना स्वाभाविक है। हम इसकी पुष्टि करते हैं कि प्राकृतिक संबंध स्पष्ट सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए, जो संप्रभुता का सम्मान करे तथा आंतरिक मामले में हस्तक्षेप अस्वीकार करे। उन्होंने आगे कहा कि स्टॉकहोम समझौते पर हस्ताक्षर 13 दिसंबर 2018 को किया गया था। यमनी संकट को सैन्य कार्रवाई से राजनीतिक प्रक्रिया में बदलने का यह महत्वपूर्ण अवसर था। इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह समझौता अरब गठबंधन बलों और होदेइदाह में हूथी मिलिशिया पर वैध यमनी बलों द्वारा लागू सैन्य दबाव का परिणाम था। आज हम हूथी मिलिशिया का सामना कर रहे हैं, जाे बड़ी बाधा है। गर्गश ने कहा कि स्वीडन में समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के महीनों बीतने के बावजूद हूथी अभी भी होदेइदाह, सलीफ और रास ईसा के बंदरगाहों से वापस जाने की प्रतिबद्धता लागू करने में हिचकिचा रहा है। इस समझौते के परिणामस्वरूप यमन की मानवीय स्थिति में सुधार हो रहा है। इस स्थिति को सुधारने के लिए हमारे पास हूथी काे शिथिलता नहीं बरतने देने का अवसर है। हूथी का उद्देश्य समझौते को बाधित करना है। उन्हाेंने कहा कि हम संयुक्त राष्ट्र के प्रयास और यमन में संयुक्त राष्ट्र के दूत मार्टिन ग्रिफिथ्स काे समर्थन देना जारी रखेंगे। सऊदी अरब के नेतृत्व में अरब गठबंधन के प्रयासों की पुष्टि करते हुए गर्गश ने आगे कहा कि यमन में वैधता हासिल करने और तख्तापलट को अस्वीकार करने के साथ-साथ देश में मानवीय और विकास परियोजनाओं को समर्थन देना जारी रखा जाएगा। डॉ. गर्गश ने कहा कि यूएई फिलिस्तीनी संकट के बारे में अरब सहमति का भी समर्थन करता है। फिलिस्तीनी संकट के स्थायी समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून और अरब शांति पहल के अनुसार।पूर्वी यरुशलम काे राजधानी मानते हुए 4 जून 1967 की सीमा के आधार पर स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना का समर्थक है। उन्होंने फिलिस्तीनी कारण और फिलिस्तीनी शरणार्थियों के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का भी आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि फिलिस्तीनी मुद्दे का सही समाधान में यूएई प्रमुख कारण बना हुआ है, देश की प्रतिबद्धता उजागर करने के साथ-साथ अरब एकजुटता में निरंतर समन्वय और संचार की आवश्यकता है। सीरिया के बारे में उन्होंने कहा कि सीरिया के नए संयुक्त राष्ट्र दूत का स्वागत किया जाना चाहिए तथा उनकी काेशिश पर जोर देते हुए जेनेवा में हस्ताक्षरित प्रस्तावों के आलाेक में सीरिया संकट का राजनीतिक समाधान खाेजना चाहिए। उन्होंने फिर सीरियाई संकट में अरब भूमिका की पुष्टि करते हुए कहा कि लगातार गैर-अरब क्षेत्रीय हस्तक्षेप हाेने पर सीरियाई संकट हल करने न्म अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को कमजोर करता है। लीबिया के बारे में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत डॉ. घासन सलाम के प्रयासों पुष्टि की, जिन्होंने राजनीतिक समाधान के माध्यम समझौता करने की मांग की थी, जो लीबिया में सुरक्षा और स्थिरता की वापसी की गारंटी देता है। उन्होंने कहा कि यूएई लीबिया में अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का समर्थन करने के लिए वह सब कर रहा है, जिससे अरब प्रयासों काे मदद मिले। उन्होंने कहा कि यूएई देख रहा है कि पिछले एक दशक के दाैरान आतंकवाद का सामना करने में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के प्रयास प्रभावी रहे हैं। आतंकवादी दहेश संगठन को हराना इसका सबसे अच्छा प्रमाण है। यमन और लीबिया में अलकायदा और दाएश संगठनों पर हमले इन प्रयासाें का पुख्ता प्रमाण है। हमें चरमपंथ का सामना करने की दिशा में काम करने का दृढ़ विश्वास है। उन्होंने कहा कि हमने मानव भ्रातृत्व पर दो धार्मिक नेताओं द्वारा मानव बिरादरी घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए जाने काे भी देखा। ये अतिवाद काे पराजित करने के लिए जरूरी कदम है। अतिवाद की जगह उदार समावेशी दृष्टि की प्रतिस्थाना का प्रतिनिधित्व अरब के रणनीतिक लक्ष्य स्थिरता, विकास और समृद्धि का परिचायक है। अनुवादः वैद्यनाथ झा http://wam.ae/en/details/1395302745491

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