विशेष ओलंपिक की प्रेरक अधिकारी ने कहा, अब तक का सबसे समावेशी अबू धाबी विशेष ओलंपिक हाेगा 

अबू धाबी, 13 मार्च 2019 (डब्ल्य़ूएएम) - पहली बार मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका क्षेत्र में आयोजित हाेने वाली विशेष ओलंपिक विश्व खेल अबू धाबी 2019 दृढ़ संकल्प लोगों के बारे में धारणा बदल देगा, बाधाओं को ताेड़ देगा और समावेशन काे बढ़ावा देका। यह बात स्पेशल ओलंपिक की मुख्य प्रेरक अधिकारी लोरेटा क्लेबोर्न ने कही। उन्हाेंने कहा कि यूएई में समावेशी भाव बढ़ाने में खेल आगे है। यह देश खेलों की मेजबाी के लिए उपयुक्त है। ऐसा इसलिए कि ये विशेष ओलंपिक आंदोलन के सभी आदर्शों विशेष रूप से सहिष्णुता और करुणा का प्रतिनिधित्व करता है। दृष्टिदाेष और बौद्धिक अक्षमता की शिकार एक लड़की चार साल की उम्र तक न चल-फिर पाती थी और न ही बाेल ही पाती थी। उनके सामने मुसीबताें का पहाड़ खड़ा था। बाधाओं के बावजूद क्लैबोर्न ने चीजों को शानदार तरीके से बदल दिया। अपनी अविश्वसनीय कहानी साझा करके दुनिया में लाखों लोगों को प्रेरित कर रही है। बुधवार को उन्होंने मजलिस मोहम्मद बिन जायद द्वारा आयोजित व्याख्यानमाला में इस बात का जिक्र किया। अमीरात पैलेस में चेंजिंग द गेम फॉर इंक्लूजन विषय पर आयोजित व्याख्यान में विचार प्रकट करते हुए क्लेबोर्न ने कहा कि कैसे विशेष ओलंपिक आंदोलन ने बौद्धिक विकलांग लोगों के जीवन में सुधार करने के साथ ही रूढ़ियों को ध्वस्त किया है और सहिष्णुता व समावेश को बढ़ावा दिया है। व्याख्यान में ज़ायद बिन सुल्तान अल नाहयान चैरिटेबल और मानवतावादी फाउंडेशन न्यासी बोर्ड के अध्यक्ष महामहिम शेख नाहयान बिन जायद अल नाहयान के अलावा गणमान्य लोग उपस्थित थे। विशेष ओलंपिक के बारे में उन्हाेंने कहा कि इस साल का सबसे बड़ा वैश्विक खेल का आयोजन अबू धाबी में किया जा रहा है। मेरा मिशन खेलों से परे समाज में बौद्धिक विकलांग लोगों के बारे में समावेश फैलाना है। यूएई की टीम- दृढ़ संकल्प के लाेगाें से मुझे प्यार है। मुझे विश्वास है कि पहली बार मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका क्षेत्र में आयोजित विश्व खेल 2019 दृढ़ संकल्प लाेगाें के बारे में धारणा बदल देगा, बाधाओं को तोड़ेगा समावेशी भावना काे बढ़ावा देगा। यूएई में समावेशी भाव बढ़ाने में खेल आगे है। यह देश खेलों की मेजबानी करने के लिए उपयुक्त है। जीवन के आरंभ में क्लेबोर्न काे व्यक्तिगत ताैर पर जिस पीड़ा का अनुभव हुआ उसे अमूमन विकलांग लोगों को समाज द्वारा स्वीकार करने में सहना पड़ता है। गरीबी के कारण क्लेबोर्न की मां उन्हें पढ़ने पब्लिक स्कूल भेजी। स्कूल में उनकी विकलांगता के वजह से साथीगण ताना मारा करते थे। 12 साल की उम्र में क्लेबोर्न एक संस्था में दाखिल हुई। वहीं से उनकी किस्मत बदल गई। स्कूल के अधिकारीगण उनकी ऊर्जा काे भांप गए और उन्हीं की शहर में आयाेजित हाेने वाले विशेष ओलंपिक में भाग लेने की नसीहत दी। आखिरकर 1971 में आयाेजित विशेष ओलंपिक में वह भाग ली। ओलंपिक में भाग लेकर वह इस वजह से इतना राेमांचित थी कि लोग उनके लिए खुश हुए। वह सुर्खियों में आ चुकी थी। इस तरह क्लेबोर्न के लिए एक बार में सब कुछ बदल गया। कुछ सप्ताह बाद वह एक अन्य विशेष ओलंपिक में भाग ली। वहां स्वयंसेवकों ने उन्हें एक एथलीट के रूप में देखा, न कि विकलांग व्यक्ति के रूप में। खेल क्षेत्र में मिली सफलता उन्हें सशक्त बनाया और उन्हें आत्म उपलब्धि की भावना से भर दी। अगले 20 वर्षों में क्लेबोर्न कई विशेष ओलंपिक जैसे फिगर स्केटिंग, गोल्फ, टेनिस, फुटबॉल और हॉकी और 26 मैराथन दौड़ में भाग ले चुकी है। यहां तक कि बोस्टन मैराथन में दो बार शीर्ष 100 महिला फिनिशरों में स्थान बना चुकी है। उन्हें कराटे में चौथी डिग्री ब्लैक बेल्ट भी हासिल है। क्लेबोर्न समावेशन के लिए एक चैंपियन बन चुकी है। उनकी जीवन का मिशन विकलांगाें काे हाशिए पर नहीं छोड़ना है। महिलाएं आमतौर पर अल्पसंख्यक के ताैर पर मानी जाती है। बौद्धिक अक्षमता वाले लोगाें काे अक्सर दोहरे भेदभाव का सामना करना पड़ता है। यूएई के शासकों ने हमेशा पीढ़ी दर पीढ़ी महिलाओं को देश की सफलता में बराबर की भागीदारी के रूप में प्रेरित किया है। एक बार दृष्टिकोण बदलने पर क्या कुछ संभव है, इसे यूएई ने दिखाया है। अबू धाबी खेलों में महिला एथलीटों की रिकॉर्ड संख्या है। कुल प्रतियोगियों का लगभग 40 प्रतिशत महिला एथलीटें हैं। ये अब तक का सबसे समावेशी विशेष ओलंपिक विश्व खेल हाेने वाला है। व्याख्यान में यूएई, सऊदी अरब, मिस्र और कुवैत की चार महिला एथलीटाें ने भी अपनी सफलता की कहानी साझा की। सभी ने इस बात का जिक्र किया कि कैसे विशेष ओलंपिक आंदोलन ने चीजाें काे माेड़ने और जीवन को बदलने में मदद की। अनुभव साझा करते हुए उन सभी ने उपस्थित लाेगाें से कहा कि एमईएऩए क्षेत्र में महिला एथलीटों को खेल में शामिल करना सफलता के लिए क्याें महत्वपूर्ण है। संयोग से अबू धाबी खेल पहली बार सऊदी अरब की महिला एथलीटों की मेजबानी करेगा। व्याख्यान में विशेष ओलंपिक के अध्यक्ष टिमोथी श्राइवर, कई शेख, राजदूत, वीआईपी, खेल में भाग लेने वाले प्रतिनिधियाें के प्रमुखाें समेत एथलीटगण शामिल थे। अनुवादः वैद्यनाथ झा http://wam.ae/en/details/1395302747241

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