जिनेवा स्थित यूएई प्रतिनिधि ने असहिष्णुता व भेदभाव का मुकाबला करने के लिए यूरोपीय संघ की बैठक में लिया भाग 

जिनेवा, 10 अप्रैल, 2019 (डब्ल्यूएएम) - मानवाधिकार परिषद् प्रस्ताव संख्या 16/18 के कार्यान्वयन के बारे में इस्तांबुल प्रक्रिया के हिस्से के रूप में लाेगाें के धर्म व विश्वास के खिलाफ असहिष्णुता, नकारात्मक रूढ़िवादिता, कलंक, भेदभाव से निपटने काे लेकर जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र में यूएई के स्थायी प्रतिनिधि ओबैद सलेम अल ज़ाबी और जिनेवा में इस्लामिक सहयोग संगठन के अध्यक्ष ने यूरोपीय संघ (ईयू) द्वारा आयोजित बैठक में भाग लिया। बैठक के दौरान राजदूत अल ज़ाबी ने बैठक के आयोजन में योगदान देने वाले पक्षाें काे धन्यवाद दिया। ये बैठक विचारों और विशेषज्ञता मामले में आदान-प्रदान करने का अवसर था। उन्होंने सह-अस्तित्व और देश में सहिष्णुता काे बढ़ावा देने के लिए यूएई की नीति का संक्षिप्त अंश प्रस्तुत किया, जिसका उद्देश्य चरमपंथ और असहिष्णुता का मुकाबला करना है। उन्हाेंने कहा कि इस नीति ने कई उपलब्धियां हासिल की है, जिसमें 2015 में भेदभाव-विरोधी कानून लागू करना शामिल है। इसके अलावा 2016 में सहिष्णुता मंत्रालय की स्थापना और 2017 में सहिष्णुता काे लेकर एक अंतर्राष्ट्रीय संस्थान का शुभारंभ भी उपलब्धियाें में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यूएई सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता का केंद्र है। देश में रहने वाले धार्मिक अल्पसंख्यकों के 120 चर्चें और कई अन्य पूजा स्थलाें की मेजबानी करने पर यूएई काे गर्व है। अल ज़ाबी ने फरवरी 2019 में कैथोलिक चर्च के प्रमुख परम पावन पाेप फ्रांसिस व अल अजहर के ग्रैंड इमाम डॉ. अहमद अल तैयब की यूएई की ऐतिहासिक यात्रा के अवसर पर अबू धाबी घोषणापत्र पर हस्ताक्षर का जिक्र किया। पाेप व ग्रैंड इमाम द्वारा साक्षा घोषणापत्र पर हस्ताक्षर 2019 में सहिष्णुता की राजधानी और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का समर्थन करने की दिशा में यूएई की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। यात्रा के दौरान पोप फ्रांसिस ने सहिष्णुता और आपसी समझ के अंतरराष्ट्रीय संदेश प्रस्तुत किए, जो संकल्प प्रस्ताव संख्या 16/18 के मूल का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने अबू धाबी घोषणा में निहित अन्य धार्मिक नेताओं के संदेशों पर भी प्रकाश डाला। अंत में अल ज़ाबी ने निष्कर्ष के ताैर पर कहा कि नस्लवाद और अतिवादी विचारधाराओं से मुक्त खुले समुदाय आर्थिक, सांस्कृतिक व सामाजिक सफलता प्राप्त कर सकते हैं, जो यूएई के 47 वर्षों के अनुभव से साबित होता है। बैठक के दौरान जिनेवा में इस्लामिक सहयोग संगठन के स्थायी प्रतिनिधि नसीमा बागली सहित कई प्रतिभागियाें जैसे मानवाधिकार संधि शाखा के प्रमुख सह मानवाधिकार के लिए संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त कार्यालय के इब्राहिम सलामा व क्रोएशिया के मुफ़्ती डॉ. अजीज हसनोविक ने पोप फ्रांसिस के यूएई यात्रा की तारीफ की। उक्त प्रतिनिधियाें ने विश्व शांति और सह जीवन के लिए मानव भ्रातृत्व दस्तावेज़ के सिद्धांतों को लागू करने के प्रयास काे महत्व दिया, जिस पर पोप फ्रांसिस और डॉ. अल तैयब ने हस्ताक्षर किए थे। अनुवादः वैद्यनाथ झा http://wam.ae/en/details/1395302754532

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