•  الشارقة ورأس الخيمة يشهدان العرض الأول لفيلم  خورفكان 1507  (medium) (6)
  • حاكما الشارقة ورأس الخيمة يشهدان العرض الأول لفيلم
  • حاكما الشارقة ورأس الخيمة يشهدان العرض الأول لفيلم
  • حاكما الشارقة ورأس الخيمة يشهدان العرض الأول لفيلم
  • حاكما الشارقة ورأس الخيمة يشهدان العرض الأول لفيلم
  • حاكما الشارقة ورأس الخيمة يشهدان العرض الأول لفيلم
  • حاكما الشارقة ورأس الخيمة يشهدان العرض الأول لفيلم

शारजाह व आरएके शासक ने ऐतिहासिक फिल्म खोर फक्कान 1507 के प्रीमियर में हुए शामिल  

शारजाह, 13 अप्रैल, 2019 (डब्ल्यूएएम) - सुप्रीम काउंसिल के सदस्य व शारजाह के शासक महामहिम डॉ. शेख सुल्तान बिन मुहम्मद अल कासिमी और सुप्रीम काउंसिल के सदस्य और रास अल खैमाह के शासक महामहिम शेख सऊद बिन सक्र अल कासिमी ने क्राउन प्रिंस और शारजाह के उप शासक महामहिम शेख सुल्तान बिन मोहम्मद बिन सुल्तान अल कासिमी की उपस्थिति में शाम के वक्त खोर फक्कान 1507 फिल्म के प्रीमियर में भाग लिया। शारजाह फिल्म प्राेडक्शन की यह सिनेमा 16 वीं शताब्दी में पुर्तगालियों द्वारा आक्रमण के समय खोर फक्कान के लोगों की प्रतिरोध की कहानी बयां करता है। ऐतिहासिक फिल्म का निर्माण शारजाह रेडियो और टीवी अथॉरिटी द्वारा महामहिम शेख सुल्तान के सहयाेग से किया गया है। यह सिनेमा खोर फक्कान निवासियों ने पुर्तगाली कब्जे से कैसे मुकाबला किया इसकी कहानी बयां करता है। शारजाह के शासक महामहिम की पुस्तक के परिचय में खोर फक्कान की स्थिति चित्रित की गई है। जब पुर्तगाली कमांडर अफोंसो डी अल्बुकर्क के नेतृत्व में छह जहाजों का एक पुर्तगाली बेड़ा और एक स्थानीय नाव (स्नोबुक) से रईसों का एक समूह उत्तर की ओर होर्मुज भागने की कोशिश कर रहा था, तब घटनाक्रम तेजी से बदलती है। नाव खोर फक्कान पहुंचने पर सिरा खोर फक्कान द्वीप अभी का तथाकथित शार्क द्वीप के पीछे स्थानीय लोगों को पुर्तगालियाें के नजदीक पहुंचने की चेतावनी देने पीछे मुड़ गई। खोर फक्कान निवासियाें ने विरोध करने और पुर्तगाली आक्रमणकारियों के सामने आत्मसमर्पण नहीं करने की सहमति व्यक्त की, विशेष रूप से यह जानने के बाद कि आक्रमणकारियाें के खोर फक्कान आगमन से पहले उन क्षेत्रों में क्या हुआ था। खोर फक्कान की लड़ाई बेड़े के आगमन के बाद बमबारी और सैन्य बलों के उतरने के बाद शुरू होती है। शहर पर हमला करने से पहले अफोंसो डी अल्बुकर्क ने कान काटने और नाक काटने के अमानवीय शौक का अभ्यास किया और युवा लोगों को कैदियों के रूप में सेवा करने के लिए बेड़े में ले लिया। फिल्म में 300 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया, जिसमें अरब, अमीराती कलाकारों और निर्माता भी शामिल थे। शूटिंग के सभी चरण खोर फक्कान, खेतों, पहाड़ों और प्राचीन शहर के किनारों पर फिल्माए गए हैं। ऐतिहासिक खोर फक्कान दीवार अकीन का निर्माण किया गया था। खोर फक्कान दीवार की खुदाई की गई तथा पुनः उसी विशिष्टता के साथ मुख्य द्वार, घर और मस्जिद का पुनर्निर्माण किया गया। वास्तविक दृश्यों को शूट करने के लिए छह जहाजों के सटीक ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर वास्तविक आकार के एक पुर्तगाली जहाज के अलावा उस समय इस्तेमाल किए गए विभिन्न प्रकार के स्थानीय जहाजाें का निर्माण किया गया था। इन खासियत के साथ इस फिल्म निर्माण के पीछे महामहिम शारजाह के शासक का मकसद उस प्रतिरोध के विचार को स्थापित करना है जिसे देश के इतिहास में उस महत्वपूर्ण अवधि के दौरान खोर फक्कान में अंजाम दिया गया था, जिससे वर्तमान पीढ़ी विशेष रूप से युवागण क्रूर पुर्तगाली आक्रमण और कब्जे के खिलाफ खाेर फाक्कान के स्थानीय लाेगाें की पीड़ा व उनके प्रतिरोध समझ सकें। फिल्म शो में बड़ी संख्या में शेख, मंत्री, गणमान्य व्यक्ति और राज्य के वरिष्ठ अधिकारियाें ने भाग लिया। अनुवादः वैद्यनाथ झा http://wam.ae/en/details/1395302755095

WAM/Hindi