• دائرة تنمية المجتمع تؤكد دورها في تنظيم دور العبادة بإمارة أبوظبي
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अबू धाबी में पहले हिंदू मंदिर का हुआ शिलान्यास 

अबू धाबी, 20 अप्रैल, 2019 (डब्ल्यूएएम) - अबू धाबी के पहले हिंदू मंदिर का शिलान्यास आज अबू धाबी-दुबई हाइवे पर स्थित बू मरीखा इलाके में किया गया। इस मंदिर में आर्ट गैलरी, हॉल, लाइब्रेरी, जिम की सुविधाओं के साथ ही सांस्कृतिक परिसर, 55,000 स्क्वायर मीटर अद्भूत वास्तुकला और नक्काशी की सुविधा होगी, जो शांति और आध्यात्मिकता के बारे में भारतीय धर्मग्रंथों के प्राचीन कहानियों को फिर से बयां करेगी। शनिवार को अबू धाबी में पहले पारंपरिक हिंदू मंदिर के शिलान्यास समारोह के दौरान डीसीडी के अध्यक्ष डॉ. मुगीर खमीस अल खली ने कहा कि अबू धाबी के क्राउन प्रिंस व यूएई सशस्त्र बलों के उप सुप्रीम कमांडर सह अबू धाबी कार्यकारी परिषद के अध्यक्ष महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान द्वारा जारी 2018 के संकल्प संख्या 57 के तहत अबू धाबी-सामुदायिक विकास (डीसीडी) मंदिर में पूजा और सार्वजनिक उपयोग के स्थल, क्लब, खेल संस्थान की स्थापना के साथ ही मौजूदा मानदंड और प्रणाली के देखरेख व अनुपालन किए जाने के लिए अन्य संबंधित विभाग से मिलकर विनियमित करने वाले कानूनी ढांचे विकसित कर रहा है। शिलान्यास समारोह में जलवायु परिवर्तन व पर्यावरण मंत्री डॉ. थानी बिन अहमद अल ज़ायाेदी, उच्च शिक्षा व उन्नत कौशल राज्य मंत्री डॉ. अहमद बिन अब्दुल्ला हुमैद बेलहौल अल फलासी और यूएई में मंदिर निर्माण करने वाला धार्मिक और सामाजिक संगठन स्वामीनारायण संस्था बीएपीएस के आध्यात्मिक अगुआ महंत स्वामी महाराज समेत भारत गणराज्य के यूएई में राजदूत नवदीप सूरी ने भाग लिया। डॉ. अल खली ने कहा कि यूएई में पूजा स्थलाें की स्थापना यूएई में रहने वाले सभी लोगों के धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए यहां की सरकार द्वारा उठाए गए व्यावहारिक कदम है, जो यूएई में लागू कानूनों और नियमों के साथ-साथ देश के रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुरूप उनकी धार्मिक जरूरत पूरा करता है। स्वामीनारायण संस्था-बीएपीएस के आध्यात्मिक अगुआ के यूएई दौरे पर टिप्पणी करते हुए डॉ. अल अलिली ने कहा कि क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक विविधता, बहुलवाद और सांस्कृतिक सद्भाव के मूल्यों काे सम्मान देकर यूएई ने विशेषाधिकार प्राप्त स्थिति का दावा किया है, जिससे 200 से अधिक देशों के लोग शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के साथ देश में रहने के लिए प्रोत्साहित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर की आधारशिला रखना यूएई में सहिष्णुता और बहुलवाद के परिदृश्य को प्रतिबिंबित करता है। यूएई व भारत के बीच महत्वपूर्ण विकास सरकारों और लोगों के बीच मजबूत संबंध का परिचायक है। निष्कर्ष के ताैर पर उन्हाेंने कहा कि संस्थापक पिता स्वर्गीय शेख जायेद हमेशा मानते थे कि विभिन्न धार्मिक विश्वासों और राष्ट्रीयताओं के लोगों के बीच अंतरराष्ट्रीय शांति स्थापित करने का एकमात्र तरीका सह-अस्तित्व है। अनुवादः वैद्यनाथ झा http://wam.ae/en/details/1395302756845

WAM/Hindi