नाहयान बिन मुबारक ने ओआईसी महाेत्सव का किया उद्घाटन 


अबू धाबी, 24 अप्रैल, 2019 (डब्ल्यूएएम) - सहिष्णुता मंत्री शेख नाहयान बिन मुबारक अल नाहयान ने आज ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कॉपरेशन फेस्टिवल का उद्धाटऩ किया। इस चार दिवसीय इस्लामिक महाेत्सव का आयाेजन दूसरी बार यूएई की विदेश मामले मंत्रालय के सहयोग से किया गया है। महाेत्सव का मकसद इस्लामी दुनिया के देशों को एकजुट करने के साथ ही विभिन्न संस्कृतियों, परंपराओं और मूल्यों पर प्रकाश डालना है। 24 से 27 अप्रैल तक चलने वाले इस महाेत्सव का आयाेजन अबू धाबी राष्ट्रीय प्रदर्शनी केंद्र (एडीएनईसी) में किया गया है। महाेत्सव का थीम उदार सहयोग, न्याय और सहिष्णुता द्वारा एकीकृत राष्ट्र है। यह इस्लाम में अंतर्निहित सकारात्मक भाव और इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) की सांस्कृतिक विविधता काे प्रदर्शित करता है। चार महाद्वीपों के 57 सदस्य देशों की सदस्यता वाली ओआईसी संयुक्त राष्ट्र के बाद दूसरा सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय संगठन है। इस संगठन से दुनिया भर के 1.5 बिलियन मुस्लिम जुड़े हुए हैं। शेख नाहयान ने उद्धाटन भाषण में कहा कि ओआईसी महाेत्सव इस्लामिक मूल्यों और सिद्धांतों पर प्रकाश डालने तथा दुनिया के मुसलमानों काे अपने धार्मिक सिद्धांत और मूल्य पालन करने तथा दूसरे संस्कृतियाें काे ग्रहण करने की क्षमता देने का महान अवसर है। यह महाेत्सव सहिष्णुता वर्ष के पहल के उद्देश्यों और सामग्री के अनुरूप एकजुटता और सामंजस्य के मूल्यों को मजबूत करने में याेगदान देता है तथा दुनिया भर में सहिष्णुता संदेश फैलाने के लिए यूएई की प्रतिबद्धता काे दर्शाता है। उन्होंने दुनिया भर के मुसलमानों के हितों की रक्षा करने के अलावा विश्व शांति के लिए एकत्रीकरण में ओआईसी की भूमिका की प्रशंसा की। इस्लामिक सहयोग संगठन के महासचिव डॉ. यूसेफ बिन अहमद अल-ओथाइमेन ने कहा कि यह महाेत्सव महत्वपूर्ण शैक्षिक मंच है, जो मुसलमानों को उनके विश्वास की विविधता का पता लगाने का अवसर प्रदान करता है तथा गैर-मुस्लिमों को हमारे सच्चे धर्म पर करीब से नज़र डालने का माैका देता है। इस चार दिवसीय महाेत्सव के दौरान व्याख्यानमाला की श्रृंखला में प्रमुख हस्तियां विचार रखेंगे तथा यूएई, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, बुर्किना फासो और मुस्लिम दुनिया में फैले लोकगीत की लाइव प्रस्तुति हाेगी। अन्य प्रस्तुतियाें में कला विषय पर कार्यशाला और प्रदर्शनी की श्रृंखला शामिल है, जो इस्लामी सुलेख के काम को प्रदर्शित करने के साथ ही कला विकास को उजागर करती है। इस महाेत्सव में विज्ञान, कला व टाइपफेस के दुर्लभ पांडुलिपियों का संग्रह भी प्रस्तुत किया गया है। पांडुलिपि में तीसरी शताब्दी एएच से लेकर 14 वीं शताब्दी एएच तक कुरान की आयतें शामिल हैं। अनुवादः वैद्यनाथ झा http://www.wam.ae/en/details/1395302758002

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