अपशिष्ट ऊर्जा संयंत्र से बिजली लेने वाली भारत का पहला प्रोजेक्ट दिल्ली मेट्राे बनी

नई दिल्ली, 5 जून, 2019 (डब्ल्यूएएम) - भारत की राजधानी में मेट्रो रेल ने पर्यावरण के अनुकूल नेटवर्क स्थापित करने की काेशिश में उपलब्धि हासिल की है। एशियन न्यूज इंटरनेशनल (एएनआई) की बुधवार के रिपाेर्ट के अनुसार दिल्ली मेट्रो कचरे से ऊर्जा पैदा करने वाले संयंत्र से बिजली लेने वाली भारत में पहली मेट्रो परियोजना बन गई है। मेट्राे के संचालक दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने कहा कि पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर में कचरे से ऊर्जा पैदा करने के लिए स्थापित संयंत्र से 2 मेगावाट (मेगावाट) बिजली लेना शुरू कर दिया है। इस संयंत्र की उत्पादन क्षमता 12 मेगावाट है। डीएमआरसी द्वारा मंगलवार को जारी एक प्रेस बयान के अनुसार इस संयंत्र से प्रति वर्ष दिल्ली मेट्राे लगभग 17.5 मिलियन यूनिट बिजली लेगी। बयान में कहा गया है कि अत्याधुनिक सुविधा वाले इस संयंत्र की स्थापना 1,500 टन प्रति दिन (टीपीडी) से ऊपर कचरे संसाधित कर 12 मेगावाट हरित ऊर्जा पैदा करने केे लिए की गई है। कचरे से बिजली पैदा करने में भारत का पहला यह संयंत्र यूरो मानदंडाें का पालन करता है। इस संयंत्र से 8 मिलियन टन ग्रीनहाउस गैसें (जीएचजी) कम हाेगी, इस प्रकार ग्लोबल वार्मिंग से मुकाबला किया जा सकेगा। दिल्ली मेट्रो ने कार्बन क्रेडिट का दावा करने में दुनिया की पहली रेल-आधारित संगठन होने का गौरव भी हासिल किया है। डीएमआरसी ने निर्माण और विध्वंस (सी एंड डी ) कचरे के पुनर्चक्रण के लिए दिल्ली के रोहिणी में 150 टन प्रतिदिन की क्षमता वाले संयंत्र शुरू की है। वर्तमान में डीएमआरसी विभिन्न रूफटॉप सौर ऊर्जा संयंत्र से 28 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन कर रहा है, जिसकी स्थापना स्टेशनों, डिपो और आवासीय परिसरों में की गई है। एएनआई रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश के रीवा में ऑफ-साइट सौर ऊर्जा संयंत्र से सौर ऊर्जा प्राप्त करने के लिए मास ट्रांजिट ऑपरेटर भी शुरू हो चुका है। अनुवादः वैद्यनाथ झा http://wam.ae/en/details/1395302766534

WAM/Hindi