उम्म अल क्वायैन का अद-डूर मंदिर- यूनेस्को विश्व विरासत का दावेदार 

  • تقرير مجتمعي / معبد الدور الأثري .. شاهد على حضارة تمتد لآلاف السنين
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विडियो तस्वीर

उम्म अल क्वायैन,18 जून, 2019 (डब्ल्यूएएम) - अद-डूर के 2,000 साल पुराने पुरातात्विक स्थल पर अब पूर्व-इस्लामिक मंदिर के संरक्षण कार्यक्रम पूरा हाे चुका है। अब उम्म अल क्वायैन के पर्यटन व पुरावशेष विभाग मंदिर और अद-डूर के पूरे क्षेत्र को यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल कराने के लिए इच्छुक है। पहली बार मंदिर की खुदाई तीस साल पहले बेल्जियम के यूनिवर्सिटी ऑफ़ गेंट की एक पुरातात्विक टीम ने की थी। टीम ने इस स्थल पर कई अन्य विशेषताओं की भी खुदाई की, जिसमें कई वर्ग किलोमीटर शामिल हैं। एड-डूर में कब्जे की मुख्य अवधि पहली और दूसरी शताब्दी की है, हालांकि कब्जे वाले क्षेत्र में 3,000 ईसा पूर्व के आसपास शुरुआती कांस्य युग और करीब 5,000 / 6,000 ईसा पूर्व नवपाषाण काल के सबूत मौजूद हैं। खुदाई के दौरान मंदिर के भीतर एक पत्थर की वेदी मिली, जिसकी दीवारें 8 मीटर 8.3 मीटर है। इसके बारे में जिस समय जानकारी मिली उस समय मंदिर की दीवारें लगभग 2 मीटर ऊंची थी। मंदिर के बाहर चार अन्य वेदियां और एक कुआं पाया गया, जिससे यह पता चलता है कि यह क्षेत्र एक विशेष क्षेत्र था। कुएं का व्यास 1.2 मीटर था तथा यह करीब 6 मीटर गहरा था। एक वेदी पर उत्खननकर्ताओं काे अरामी भाषा में एक शिलालेख मिले, जिसका इस्तेमाल ईसा युग की शुरुआत के आसपास अरब की खाड़ी सहित मध्य पूर्व में व्यापक रूप से किया जाता था। हालांकि इसे समझना मुश्किल है, लेकिन इसमें निश्चित रूप से प्रारंभिक सेमिटिक सूर्य देवता शम्स का उल्लेख है। यही वजह है कि पुरातत्वविद् मानते हैं कि मंदिर शम्स को समर्पित था। मूल खुदाई के बाद मंदिर को असुरक्षित छोड़ दिया गया, इसकी दीवारें खराब होने के साथ-साथ दरवाजे के आसपास महीन प्लास्टर की सजावट सड़ चुकी है। रखरखाव की आवश्यकता स्वीकार करते हुए पर्यटन व पुरावशेष विभाग ने संस्कृति व ज्ञान विकास मंत्रालय और संयुक्त राष्ट्र से संबद्ध शारजाह स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ द प्रिजर्वेशन एंड रेस्टोरेशन ऑफ कल्चरल प्रोपर्टी (आईसीसीआरओएम) के सहयोग से मंदिर के संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिए तीन चरण का कार्यक्रम शुरू किया। पहला चरण फरवरी 2016 में शुरू हुआ और तीन सप्ताह तक चला। इसके बाद दूसरा चरण अप्रैल 2016 में शुरू हुआ। तीन सप्ताह का अंतिम चरण दिसंबर 2016 के दौरान पूरा हुआ। ईसा युग की शुरुआत के आसपास 200 या 300 वर्षों तक यह समृद्ध रहे एड-डूर एक बंदरगाह-शहर था, जिसे अरब खाड़ी और हिंद महासागर में व्यापार से संपत्ति मिला करती थी। इसके भूमध्यसागर के साथ व्यापक व्यापारि संबंध भी थे, जैसा कि रोमन साम्राज्य से आयातित धातु के कलाकृतियों और कांच के जहाजों के साथ ही साथ सिक्कों और अन्य वस्तुओं में दिखाया गया है। अनुवादः वैद्यनाथ झा http://wam.ae/en/details/1395302768565

WAM/Hindi