'जलवायु परिवर्तन ने मेरे ग्रामीणों को भिखारी बना दिया': मैक्सिकन महिला


अबू धाबी, 1 जुलाई, 2019 (डब्ल्यूएएम) -- मैक्सिको की महिला का दावा है कि जलवायु परिवर्तन ने उसके ग्रामीणों को भिखारी बना दिया है। सोमवार को अमीरात समाचार एजेन्सी, डब्ल्यूएएम को 29 वर्षीया जेसिका वेगा ओर्टेगा ने बताया, पहाड़ी इलाके में स्थित उसके गांव की हालत तब खराब होने लगी, जब करीब पांच साल पहले गांव की एक मात्र नदी पूरी तरह सूख गई। वह अब भी उन पलों को याद करती है जब वह और उसके दोस्त नदी में तैरते थे और ओक्साका स्टेट में स्थित गांव में खेती के दौरान अपने से बड़ों के काम में हाथ बंटाती थी। न्यूयॉर्क में 21 से 23 सितंबर तक होने वाले यूएन क्लाइमेट एक्शन समिट 2019 से पहले अबू धाबी में होने वाले क्लाइमेट मीटिंग से इतर एक साक्षात्कार में महिला ने कहाः "नदी हमारी जीवन रेखा थी जिससे हमें हर चीज मिली - पीने के लिए पानी, खेती और बाकी सब कुछ।"

जैसे-जैसे वह बड़ी हुई, उसने देखा कि नदी धीरे-धीरे सूख रही है, जिससे पूरे गांव में जीवन प्रभावित हो रहा है। यह स्थान जो मेक्सिको सिटी से करीब 11 घंटे दूर में तेजी से बदलाव हो रहा था। जेसिका ने कहाः "नदी में तैरना और खेलना धीरे-धीरे एक मधुर स्मृति में बदल रहा था।"

नदी की मौत ने ग्रामीणों की एकमात्र आजीविका खेती को खत्म कर दिया। मिक्सटेक जनजाति की महिला ने कहा, "केवल आजीविका ही नहीं, यह समुदाय के सांस्कृतिक जीवन का भी अंत था।"

जेसिका का कहना है, "काम के बाद, लोग नदी के किनारे बैठते थे और पारंपरिक गीत गाते थे। वे अब भी गाते हैं, लेकिन कारण अलग हैं। भीख मांगकर आजीविका चलाने के लिए।"

आसपास के कस्बों और शहरों के लिए लोग सुबह गांव छोड़ देते हैं, सड़क किनारे स्थानीय गीत गाकर भिक्षाटन करते हैं। ओर्टेगा ने बताया, "यह अपने लोगों की दुखद कहानी है, जो गांव में एक सरल और सुखद जीवन का आनंद लेते थे। जलवायु परिवर्तन ने हमारी नदी और हमारे पारंपरिक सुखी जीवन को खत्म कर दिया।"

हालांकि, शिक्षा के मामले में वह भाग्यशाली थीं और लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम करने वाली एक कार्यकर्ता बन गई। "मैं अपने समुदाय से पहली स्नातक थी। मेरा परिवार के पास मुझे शिक्षा दिलाने के लिए पर्याप्त धन नहीं था।"

उसने अंशकालिक नौकरी की और मेक्सिको सिटी के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्वायत्त विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान और सार्वजनिक प्रशासन में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ स्वदेशी लोगों के मुद्दों को रविवार को अबू धाबी जलवायु बैठक में उठाया। अनुवादः एस कुमार.

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