भारत को गैस आधारित अर्थव्यवस्था बनाने में यूएई प्रमुख भूमिका निभा सकता है: भारतीय पेट्रोलियम मंत्री

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अबू धाबी, 12 सितंबर, 2019 (डब्ल्यूएएम) -- एक भारतीय मंत्री के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात भारत में हाइड्रोकार्बन अर्थव्यवस्था से गैस आधारित अर्थव्यवस्था के महत्वाकांक्षी संक्रमण में एक प्रमुख भूमिका निभा सकता है, क्योंकि दोनों देश "एक उत्कृष्ट संबंध का लाभ ले रहे हैं।"

अमीरात समाचार एजेंसी (डब्ल्यूएएम) से बातचीत करते हुए पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस और इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि "हालांकि यूएई गैस का प्राथमिक आपूर्तिकर्ता नहीं है, लेकिन देश में भारत की कुछ गैस परियोजनाओं जैसे पाइपलाइन, तरलीकृत प्राकृतिक गैस, एलएनजी, टर्मिनलों और शहर के गैस वितरण नेटवर्क में बड़ा निवेश भागीदार हो सकता है।"

यूएई के तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर आए प्रधान ने कहा, "हमारे पास गैस से संबंधित सभी क्षेत्रों को विकसित करने के लिए बहुत ही महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण है।"

वैश्विक औसत 24 फीसदी की तुलना में भारत के ऊर्जा मिश्रण में गैस की वर्तमान हिस्सेदारी 6.2 फीसदी है। भारत सरकार ने 2030 तक इसे बढ़ाकर 15 फीसदी करने का लक्ष्य रखा है। मंत्री ने कहा, "यूएई और भारत एक उत्कृष्ट संबंध का लाभ ले रहे हैं। हम यूएई में अवसरों के समान नए क्षेत्रों की खोज करने में रुचि रखते हैं।"

उन्होंने कहा कि यूएई की भागीदारी में पश्चिमी भारतीय राज्य महाराष्ट्र में 44 बिलियन अमेरिकी डॉलर की रत्नागिरी रिफाइनरी की परियोजना स्थल पर जल्द ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। प्रधान ने बताया, "राज्य सरकार भूमि का अधिग्रहण कर रही है और इसके पूरा होने पर विवरण सार्वजनिक होंगे।"

2018 में संयुक्त उद्यम की घोषणा की गई, जिसमें भारत में सबसे बड़ा फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (एफडीआई) सौदे शामिल हैं, जिसमें सऊदी अरामको और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (एडीएनओसी) के साथ संयुक्त रूप से 50 फीसदी स्टेक के साथ शेष भारत के राज्य के स्वामित्व वाली तेल कंपनियों के एक संघ के पास है। भारत के सबसे बड़े एफडीआई सौदों में 11 अगस्त को सऊदी अरामको की भारत के रिलायंस के ऑयल-टू-केमिकल्स कारोबार में 20 फीसदी हिस्सेदारी हासिल करने के इरादे से 15 बिलियन अमेरिकी डॉलर के सौदे की घोषणा किया। उन्होंने कहा कि यूएई की मेगा रिफाइनरी परियोजना और भारत के दक्षिण में पाडुर में भूमिगत तेल भंडारण की सुविधा के लिए इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड की भूमिगत निवेश "यूएई की भारत के साथ अधिक व्यापार करने की प्रतिबद्धता" के उदाहरण हैं। मंत्री ने कहा कि भारत को कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के आपूर्तिकर्ता के रूप में यूएई की भारत के विकास में एक प्रमुख भूमिका होगी। प्रधान ने कहा, "अब भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता है। प्रतिवर्ष 4.2 फीसदी की अनुमानित ऊर्जा मांग के साथ, भारत अगले 15 वर्षों में शीर्ष ऊर्जा उपभोक्ता बन जाएगा।"

उन्होंने अंत में कहा कि भारत के ग्रामीण विद्युतीकरण और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस आपूर्ति नेटवर्क के विस्तार से अधिक लोग ऊर्जा खपत क्लब में शामिल हो रहे हैं। अनुवादः एस कुमार.

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WAM/Hindi